aandhi men charaagh jal rahe hain | आँधी में चराग़ जल रहे हैं

  - Akhtar Hoshiyarpuri

आँधी में चराग़ जल रहे हैं
क्या लोग हवा में पल रहे हैं

ऐ जलती रुतो गवाह रहना
हम नंगे पाँव चल रहे हैं

कोहसारों पे बर्फ़ जब से पिघली
दरिया तेवर बदल रहे हैं

मिट्टी में अभी नमी बहुत है
पैमाने हुनूज़ ढल रहे हैं

कह दे कोई जा के ताएरों से
च्यूँँटी के भी पर निकल रहे हैं

कुछ अब के है धूप में भी तेज़ी
कुछ हम भी शरर उगल रहे हैं

पानी पे ज़रा सँभल के चलना
हस्ती के क़दम फिसल रहे हैं

कह दे ये कोई मुसाफिरों से
शाम आई है साए ढल रहे हैं

गर्दिश में नहीं ज़मीं ही 'अख़्तर'
हम भी दबे पाँव चल रहे हैं

  - Akhtar Hoshiyarpuri

Shaam Shayari

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