us ki chaah men naam nahin aane vaala | उस की चाह में नाम नहीं आने वाला

  - Akhtar Shumar

उस की चाह में नाम नहीं आने वाला
अब मेरा अंजाम नहीं आने वाला

हुस्न से काम पड़ा है आख़िरी साँसों में
और वो किसी के काम नहीं आने वाला

मेरी सदा पर वो नज़दीक तो आएगा
लेकिन ज़ेर-ए-दाम नहीं आने वाला

एक झलक से प्यास का रोग बढ़ेगा और
इस से मुझे आराम नहीं आने वाला
'इश्क़ के नाम पे तेरा रंग न बदले यार
तुझ पर कुछ इल्ज़ाम नहीं आने वाला

काम को बैठे हैं और सर पर आई शाम
लगता है अब काम नहीं आने वाला

क्यूँँ बे-कार उस शख़्स का रस्ता देखते हो
वो तो 'शुमार' इस शाम नहीं आने वाला

  - Akhtar Shumar

Husn Shayari

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