pade the ham bhi jahaan raushni men bikhre hue | पड़े थे हम भी जहाँ रौशनी में बिखरे हुए

  - Akhtar Shumar

पड़े थे हम भी जहाँ रौशनी में बिखरे हुए
कई सितारे मिले उस गली में बिखरे हुए

मिरी कहानी से पहले ही जान ले प्यारे
कि हादसे हैं मिरी ज़िंदगी में बिखरे हुए

धनक सी आँख कहे बाँसुरी की लै में मुझे
सितारे ढूँड के ला नग़्मगी में बिखरे हुए

मैं पुर-सुकून रहूँ झील की तरह यानी
किसी ख़याल किसी ख़ामुशी में बिखरे हुए

वो मुस्कुरा के कोई बात कर रहा था 'शुमार'
और उस के लफ़्ज़ भी थे चाँदनी में बिखरे हुए

  - Akhtar Shumar

Raushni Shayari

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