सिर्फ़ करवट नहीं हदों के बीच

इक ज़माना है करवटों के बीच

आँख पलकों के बीच ऐसी है
जैसे दरिया हो साहिलों के बीच

ज़िंदगी रेल सी गुज़रती है
साँस की दोनों पटरियों के बीच

ये कोई मसअला न बन जाए
एक आँसू है क़हक़हों के बीच

मसअला लड़कियाँ ही होती हैं
आदतन सारे दोस्तों के बीच

मुँह बना कर खड़ी रहे नफ़रत इश्क़ हो जाए सरहदों के बीच

— Aks samastipuri

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Nadii Shayari

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