बड़े अदब से बड़ी शराफ़त से देखता हूँ
मैं उस की जानिब बड़ी तबीअत से देखता हूँ
वो जाते जाते मुझे पलट कर जो देखता तो
ये देख लेता कि मैं मोहब्बत से देखता हूँ
मेरी नज़र में यही तो है इश्क़ की नज़ाकत
कि मैं बदन को भी नेक निय्यत से देखता हूँ
निगाह-ए-दिल में तुम्हारी तस्वीर बन गई है
मैं तुम को अपनी इसी ज़रूरत से देखता हूँ
कभी तो राहों में चाँद उतरेगा सामने से
इसी तवक़्क़ो में और हसरत से देखता हूँ
— Ankit Yadav















