ऐसे शगुफ़्ता रंग गुज़िश्ता कभी न थामैं फूल था मगर तेरे दर का कभी न थाइतना तेरे दयार से मुझ को अता हुआइतना नसीब ने मेरे सोचा कभी न था— Ali Mohammed Shaikh