दिल सोचता है बस ये फ़राग़त के वक़्त मेंमिलने के तुझ से ख़्वाब जो देखे थे क्या हुएजो इक अदा पे जान लुटा देते थे कभीवो सारे दावेदार मोहब्बत के क्या हुए— Almas Rizvi