burii aur bhalii sab guzar jaayegi | बुरी और भली सब गुज़र जाएगी

  - Altaf Hussain Hali

बुरी और भली सब गुज़र जाएगी
ये कश्ती यूँँही पार उतर जाएगी

मिलेगा न गुलचीं को गुल का पता
हर इक पंखुड़ी यूँँ बिखर जाएगी

रहेंगे न मल्लाह ये दिन सदा
कोई दिन में गंगा उतर जाएगी

इधर एक हम और ज़माना उधर
ये बाज़ी तो सो बिसवे हर जाएगी

बनावट की शेख़ी नहीं रहती शैख़
ये इज़्ज़त तो जाएगी पर जाएगी

न पूरी हुई हैं उमीदें न हों
यूँँही 'उम्र सारी गुज़र जाएगी

सुनेंगे न 'हाली' की कब तक सदा
यही एक दिन काम कर जाएगी

  - Altaf Hussain Hali

Khuddari Shayari

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