कोई भी हलचल नहीं है
फिर तो ये जंगल नहीं है
तू बदल है मसअलों का
मसअलों का हल नहीं हैं
शाहज़ादी सोचकर चल
मेरे घर मख़मल नहीं हैं
पेड़ की हूँ शाख जिसपर
फूटी इक कोपल नहीं हैं
हाथ में कंगन नहीं है
पैर में पायल नहीं है
है हया का गहना पहला
सिर्फ़ ये काजल नहीं है
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