मैं ने सोचा था अच्छा होगा
मालूम कहाँ था ऐसा होगा
जो होगा तेरे बा'द मिरा अब
जाने अंजाने तेरा होगा
ये सूरज जो इतना जलता है
पानी दो शायद प्यासा होगा
मिट्टी से तन बनता है, माना
फिर पत्थर से क्या बनता होगा
दुनिया जीतेगा ले जाएगा
वो जो भी उस का दूल्हा होगा
— Aman Mishra 'Anant'















