संँवर जाएगी ज़िंदगानी कभी तो
सुनेगा ख़ुदा भी हमारी कभी तो
मिली जब ख़ुशी कुछ नहीं ख़ुदकुशी की
थी वैसे भी ये मौत आनी कभी तो
कहा उसने ग़ुस्से से मुँह तोड़ दूँगी
ख़बरदार काटी ये दाढ़ी कभी तो
मिलेंगे किसी दिन तो किरदार अच्छे
बनेगी मिरी भी कहानी कभी तो
सितमगर सितम करना ये सोच कर तू
के आएगी मेरी भी बारी कभी तो
खुलेंगे ही हम पर उजाले किसी दिन
मनाएँगे हम भी दिवाली कभी तो
'अमन' सोच कर लेना उपहार कोई
जलानी पड़ेगी निशानी कभी तो
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