maine saal maheeno barson se | मैंने साल महीनो बरसों से

  - Aman Mishra 'Anant'

मैंने साल महीनो बरसों से
काम चलाया हैं बस अश्कों से

खेल रहे हैं अब जो ग़ज़लों से
तब खेला करते थे ज़ुल्फ़ों से

वो फँसता नइँ था बस बातों से
काम लिया था दोस्त इशारों से

आज उठाते हैं ज़िम्मेदारी
जो कंधे दुखते थे बस्तों से

कितना डरते हैं मरहम से वो
करना बात कभी तुम ज़ख़्मो से

बस आटा जलता हैं गैसों पर
रोटी तो बनती हैं चूल्हों से

दुख मुझको नइँ हैं धोखे का पर
बस उम्मीद नहीं थी यारों से

सोच 'अमन' नइ होता तो फिर तू
सोच कभी सजता क्या ग़ज़लों से

  - Aman Mishra 'Anant'

Gham Shayari

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