इस लिहाज़ से अपना पास आना मुश्किल है
आग और पानी का दोस्ताना मुश्किल है
मौत रास्ता है बस उस को भूल पाने का
एक शख़्स को जीते जी भुलाना मुश्किल है
जात पात की भाषा और आपसी नफ़रत
इस हिसाब से आगे ये ज़माना मुश्किल है
गाँव छोड़ आए थे कुछ कमाल करने को
ये कमाल देखो अब गाँव जाना मुश्किल है
चालबाज़ वाक़िफ़ है एक एक ख़ामी से
एक बार भी मेरा जीत पाना मुश्किल है
— Aman Deep singh















