dekh ke hamko jhoota bhi muskaate nahin | देख के हमको झूठा भी मुस्काते नहीं

  - Ambar

देख के हमको झूठा भी मुस्काते नहीं
थोड़ा सा भी तरस वो हमपे खाते नहीं

प्यार किया था तुम सेे दिल बहलाने को
कहते हुए ये बात भी वो शरमाते नहीं

काट सके तो काट ले मुझको सुन ले तू
भौंकने वाले कुत्ते मुझको भाते नहीं

ऐसा अब हम अक़्सर सोचा करते हैं
अगर न करते ऐसा तो पछताते नहीं

बहुत दिनों से नोटिस करके देखा है
कुछ तो है जो मुझ सेे वो कह पाते नहीं

करम किए हैं तुमने अंबर बहुत बुरे
तुम जैसों को जन्नत में अपनाते नहीं

  - Ambar

Baaten Shayari

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