muqammal ho mere jazbaat chaahoon | मुक़म्मल हो मेरे जज़बात चाहूँ

  - Ambar

मुक़म्मल हो मेरे जज़बात चाहूँ
तुम्हें चाहूँ तुम्हारा साथ चाहूँ

न झगड़ा हो कभी मज़हब को लेकर
मुहब्बत की सदा इक ज़ात चाहूँ

क़रीबी दोस्तों में याद रखना
वफ़ा की बस यही सौग़ात चाहूँ

मेरे दिल में बसी है इक तमन्ना
तेरे मेरे मिलन की रात चाहूँ

सभी के सामने अपना कहूँ मैं
तुम्हें इतनी मेरी औक़ात चाहूँ

  - Ambar

Jazbaat Shayari

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