tasveer teri yuñ hi rahe kaash jeb men | तस्वीर तेरी यूँँ ही रहे काश जेब में

  - Amir Ameer

तस्वीर तेरी यूँँ ही रहे काश जेब में
गोया कि हुस्न-ए-वादी-ए-कैलाश जेब में

रस्ते में मुझ को मिल गया यूँँ ही गिरा-पड़ा
मैं ने उठा के रख लिया आकाश जेब में

पंद्रह मिनट से ढूँड रहा है न जाने क्या
डाले हुए है हाथ को क़ल्लाश जेब में

आ जा कि यार पान के खोखे पे जम्अ' हैं
सिगरेट छुपा के हाथ में और ताश जेब

सब टेंट और कुर्सियों वाले कमा गए
शाइ'र ने ठूँस कर भरी शाबाश जेब में

अब उस ग़रीब चोर को भेजोगे जेल क्यूँँ
ग़ुर्बत की जिस ने काट ली पादाश जेब में

रखता नहीं हूँ पास में अपनी कभी शनाख़्त
फिरता है कौन ले के कभी लाश जेब में

  - Amir Ameer

Muflisi Shayari

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