निज़ाम-ए-बस्त-ओ-कुशाद-ए-मानीसँवारतेहैं
हमअपनेशे'रोंमेंतेरापैकरउतारतेहैं
अजबतिलिस्मीफ़िज़ाहैसारीबलाएँचुपहैं
येकिसबयाबाँमेंरातदिनहमगुज़ारतेहैं
ग़ुबार-ए-दुनियामेंगुमहैजबसेसवार-ए-वहशत
अतशअतशदश्तओकोहओदरियापुकारतेहैं
मुसाफ़िरान-ए-गुमाँरहेंक्यूँँकमर-ख़मीदा
चलोयेपुश्तारा-ए-तमन्नाउतारतेहैं
जबीन-ए-अहल-ए-ग़रज़पेकोईमुकालिमाक्या
जहाँतहाँहाजतोंकीझोलीपसारतेहैं