हर क़दम पे लगी बेड़ियाँ होती हैं
कितनी मजबूर ये लड़कियाँ होती हैं
बस पता लगने की बात है वर्ना तो
क़ैद महलों में भी रानियाँ होती हैं
ऐसी इक उम्र में आ गए हैं जहाँ
ग़लतियाँ कम ग़लत-फ़हमियाँ होती हैं
शहर के फूल भी अब महकते नहीं
गाँव में फूलों पे तितलियाँ होती हैं
सो गया भूका बच्चा ये सुनते हुए
रोटियों से भली लोरियाँ होती हैं
— Amit Kumar















