khoj sabne liya hai magar | खोज सबने लिया है मगर

  - Amit Kumar

खोज सबने लिया है मगर
ज़िंदगी का कोई हल नहीं

  - Amit Kumar

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    तेरा दुख मेरा दुख सभी का दुख
    आदमी ही है आदमी का दुख
    Amit Kumar
    इक अजब सी हम शरर में आ गए हैं
    एक लड़की के नज़र में आ गए हैं

    लगता है पूछेगी अब वो हाल मेरा
    हम भी सदमे के असर में आ गए हैं

    इस तरह से पेड़ को काटे हैं हमने
    जानवर जंगल से घर में आ गए हैं

    हम जहाँ से निकले थे आए वहीं फिर
    किस तरह के हम सफ़र में आ गए हैं

    इस तरह से छुप के रहते इन दिनों हम
    जब दिखे तो हम ख़बर में आ गए हैं
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    Amit Kumar
    सच है मगर सही नहीं
    ख़ुश हूँ मैं पर ख़ुशी नहीं

    अपनों से है पता चला
    अपना कोई है ही नहीं

    लगता है साथ है मिरे
    वो जो कभी था भी नहीं
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    Amit Kumar
    घड़ा अपने हिस्से का भर जाना है
    यहां एक दिन सब ने मर जाना है

    कोई बीच का रस्ता है ज़िंदगी
    जो सबको इधर से उधर जाना है

    कई बैठा लेंगे मुझे पलकों पे
    कई के नज़र से उतर जाना है

    ये लगता है दुनिया मुझे घूम के
    कि बस जल्द से जल्द घर जाना है

    यही डर जो रखता है ज़िंदा मुझे
    अमित हम ने इक रोज़ मर जाना है
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    Amit Kumar
    रोना था सो हँसी मार दी
    पानी ने ख़ुद नमी मार दी

    मर गए लोग कुछ मौत से
    कुछ को तो ज़िंदगी मार दी

    उम्र भर वेट करते तिरा
    हम को बस ये घड़ी मार दी

    हम नहीं मरते बीमारी से
    बस दवा की कमी मार दी

    इतना जीवन अँधेरे में था
    हम को इक रौशनी मार दी
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    Amit Kumar

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