हर एक दर्द देता है राहत कभी कभीमिलती है इश्क़ में भी इनायत कभी कभीहम यूँ भी दिल की बात लबों तक न ला सकेकरती है ख़ामुशी भी शिकायत कभी कभीजो आज पास है वो ही कल याद हो कहींहोती है वक़्त की ये सियासत कभी कभीउलझे हैं ख़्वाब भी तेरी ज़ुल्फ़ों के जाल मेंहोती है दिल पे ऐसी क़यामत कभी कभी— amit kumar gangle