नज़र में वो पुरानी याद आएजो मुझ को आज तक भी नोच खाएफ़ना हूँ इश्क़ में तेरे बता देकहाँ तक अब तू मुझ को आज़माएसितारों से भरी थी रात लेकिनतेरा रुख़्सार ही जब दिल को भाएनशा क्या कम है तेरी बात का भीकोई फिर क्यूँ भला मय-ख़ाना जाएसदाएँ दे रहा है दिल मुसलसलकहीं से काश वो इक बार आए— amit kumar gangle