निकल पड़ा हूँ मैं फिर बाद-ए-कुह्न-यार चले

  - Amit Nandan Dev
निकलपड़ाहूँमैंफिरबाद-ए-कुह्न-यारचले
जिधरभीदिलकाइशाराहोबेक़रारचले
निकलपड़ेहैंसुलगतेहुएशरारचले
कोईराहमंज़िलरहगुज़ारचले
उठाकेबस्त-ए-गिरेबाँमेंचंदगर्दिश-ए-ग़म
तलाश-ए-कू-ए-वफ़ामेंभीहमबहारचले
किसीनेपूछाकिक्याहालहैबिछड़नेका
हमअपनीरूहकेटुकड़ोंमेंबार-बारचले
थावोज़िक्रमगरदिलनेफिरउछालीबात
कियूँँहीज़ख़्मसेनिकलेयूँँहीबहारचले
सुनाईदेकहींफिरसाज़-ए-दिलकीधीमीसदा
किकबतलकयेख़मोशीकाकारोबारचले
नसीबक्याथाहमेंलफ़्ज़क्यामुयस्सरथे
किएकनामपेबसदर-ब-दरख़ुमारचले
किसीनेहाथबढ़ायाकोईहमदमथा
हमअपनेसाएकोलेकरभीबेक़रारचले
निशात-ए-ग़मसेगुज़रकरख़िज़ाँकीराहचले
किफिरबहारकीसूरतसुलूक-ए-दारचले
तमामउम्रबयानोंसेसख़्तज़ख़्ममिले
कभीतोख़ून-ए-हक़ीक़तमेंइस्तिख़ारचले
हमेंख़बरथीकिइसराहमेंउजालेकम
मगरजुनूँकीतहम्मुलमेंबार-बारचले
ग़मोंकाशौक़थाइतनाकिख़ुदभीरुकसके
कहींबहारसेनिकलेतोसू-ए-दारचले
हिजाब-ए-शहरमेंहमक़ाफ़िलाबनपाए
तोसुर्ख़-रूकभीकूचाकभीमज़ारचले
जोख़्वाबदेखकेनिकलेथेकूचा-ए-ग़मसे
वोख़्वाबभीमिरेआख़िरमिज़ा-ए-दारचले
गुनाहथाकिबग़ावतज़मानादेखचुका
हमएकजश्नमेंशामिलथेफिरशिकारचले
मुझेथीकभीमंज़िलसे'देव'कोईनिस्बत
मगरजोराहमेंरोयावोशहसवारचले
सबाकेपासथेनक़्शेतमामदहरकेग़म
मगरवोसोचतीकिसदमकिधरग़ुबारचले
हवा-ए-दश्तमेंजलतेहैंताजभीसरभी
हमएकचराग़बुझानेकाइख़्तियारचले
किसीकोशौक़थाअज़्मतकिसीकोलालचथी
हमऐसेलोगथेजोख़ाककेक़रारचले
ख़ुदानेहमसेेकहाथाकिहौसलारखना
मगरबशरथेजहाँकेहरइख़्तियारचले
अबवोसोज़रंगीनियोंकाहालकोई
हमअपनेदिलकीगिरहतकलिएबिसारचले
वहीअज़ाबकिहरसम्तआरज़ूठहरी
किसीकोदेखकेरोनाकिसीकोप्यारचले
हयात-ए-ज़ीस्तकानक़्शामिटाचुके'देव'अब
हमअपनेख़्वाबसेनिकलेतोयादगारचले
  - Amit Nandan Dev
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