रंजिश को भुलाने में ज़रा वक़्त लगेगा

दिल फिर से लगाने में ज़रा वक़्त लगेगा

हर ज़ख़्म की ताज़ा है अभी अपनी कहानी
क्या हाल सुनाने में ज़रा वक़्त लगेगा

यूँ उस की गली छोड़ के जाना तो पड़ा है
पर ख़ुद को मनाने में ज़रा वक़्त लगेगा

'देव' उस की मोहब्बत का असर देख तो लेंगे
पर होश में आने में ज़रा वक़्त लगेगा

अब कौन बताए कि ये ख़ामोशियाँ क्या हैं
कुछ राज़ बताने में ज़रा वक़्त लगेगा

लब तक तो पहुँच जाएगी बात-ए-दिल-ओ-जाँ पर
आँखों को बताने में ज़रा वक़्त लगेगा

रिश्तों की सियासत से मैं थक-थक के गिरा हूँ
अब ख़ुद को उठाने में ज़रा वक़्त लगेगा

सहराओं में तहज़ीब के फूलों का भरम है
इस वहम को जाने में ज़रा वक़्त लगेगा

तदबीर से थक जाएगी ये ज़िंदगी इक दिन
बस मौत को आने में ज़रा वक़्त लगेगा

'देव' अब न तसल्ली न तबीबों की ज़रूरत
इस दर्द को जाने में ज़रा वक़्त लगेगा

— Amit Nandan Dev

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