हौले-हौले मेरे पास आया करो
धड़कनें यूँ मेरी तुम बढ़ाया करो
इश्क़ की बारिशों में मेरे साथ तुम
तोड़ बंधन सभी भीग जाया करो
कब तलक बस गले ही मिलोगी कभी
होंठ से होंठ भी तो मिलाया करो
सोचना दूर जाने की बातें न तुम
हो ख़ता कोई तो रूठ जाया करो
बे-वफ़ाओं से तो है ये दुनिया भरी
हो अलग तो वफ़ा तुम निभाया करो
मैं भले याद आऊँ तुम्हें रात-दिन
तुम मगर याद मुझ को न आया करो
यूँ बिगड़ जाएँगी आदतें प्यार में
हर दफ़ा तुम मुझे मत मनाया करो
छूट जाए क़लम भूल जाए ग़ज़ल
रहम 'रेहान' पे कुछ ख़ुदाया करो
— Rehaan















