क्यूँँ ज़ीस्त का हर एक फ़साना बदल गया
ये हम बदल गए कि ज़माना बदल गया
सय्याद याँ वही वही ताइर वही हैं दाम
लेकिन जो ज़ेर-ए-दाम था दाना बदल गया
बाज़ी-ए-हुस्न-ओ-इश्क़ में कुछ हार है न जीत
नज़रें मिलीं दिलों का ख़ज़ाना बदल गया
बख़्त-ए-बशर वही है बिसात-ए-जहाँ वही
हर दौर-ए-नौ में मात का ख़ाना बदल गया
ताक़त के दोश पर है अज़ल से बशर की लाश
बस थोड़ी थोड़ी दूर पे शाना बदल गया
महफ़िल के हस्ब-ए-ज़ौक़ है मुतरिब का साज़ भी
महफ़िल बदल गई तो तराना बदल गया
इन दाग़-हा-ए-दिल में कोई ज़ख़्म-ए-नौ नहीं
शायद किसी नज़र का निशाना बदल गया
'मुल्ला' को ज़ोर-ए-तब्अ हुआ फ़ैसलों की नज़्र
दरिया अभी वही है दहाना बदल गया
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by Anand Narayan Mulla
our suggestion based on Anand Narayan Mulla
As you were reading Nadii Shayari Shayari