तेरे हर फ़न पर लानत है
तेरे जीवन पर लानत है
गीत ग़ज़ल कविता नज़्मों पर
तेरे हर धन पर लानत है
मरने की कोशिश में ज़िंदा
इस मुर्दा तन पर लानत है
जिस ने तेरी शक्ल छिपाई
बैरी चिलमन पर लानत है
हाथ मिलाकर यार कहा था
ऐसे दुश्मन पर लानत है
हल्के झोंके में टूटा जो
नाज़ुक बंधन पर लानत है
फ़िक्र नहीं जिस में दुनिया की
उस पागलपन पर लानत है
— Anmol Mishra















