kuchh rishte kuchh rishton jaise hote nai | कुछ रिश्ते कुछ रिश्तों जैसे होते नइंँ

  - Anmol Mishra

कुछ रिश्ते कुछ रिश्तों जैसे होते नइंँ
रख लो सिर मेरे कंधे पर रोते नइंँ

ख़ुद ही मारो ख़ुद ही ख़ुद में मर जाओ
ख़ुद की लाशें ख़ुद कंधों पर ढोते नइंँ

क़स
में वादे झूठे मूठे चक्कर हैं
ख़ातिर इनकी हम जैसे को खोते नइंँ

दिन भर तुमको नींद बहुत ही आती है
जगने वाले रात पहर भर सोते नइंँ

चढ़ जाने दो रंग को रेशों रेशों पर
कच्चा रंग है ऐसे कपड़े धोते नइंँ

सींचो अपने ख़ून पसीने से मिट्टी
ऐसे ही बंजर में दाने बोते नइंँ

तेरी आँखें उस पर गहरी सागर सी
डूब मरोगे इन आँखों में गोते नइंँ

  - Anmol Mishra

Diversity Shayari

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