ये सब पाया पागलपन से चल हट पागल
फिर भी मुझ से सब हैं कहते चल हट पागल
पागलपन में सोऊँ जागूँ उट्ठूँ बैठूँ
पागल हूँ मैं पागलपन से चल हट पागल
चल हट पागल छोड़ कलाई जाने भी दे
जाने दूँ? तुम आए कब थे? चल हट पागल
दुनिया बोली ठीक नहीं है ये पागलपन
मैं बोला, क्या मतलब तुझ से? चल हट पागल
लौटी लहरें साहिल से हरदम ये कह कर
रेत उड़ाओ हम हैं जाते चल हट पागल
पागलपन की हद तक जाना पागलपन है
मैं जाऊँगा हद से आगे चल हट पागल
ख़ुद से बातें करने वाले पागल हैं गर
दम है ख़ुद को चुप रहने दे चल हट पागल
जब जब पागल होता हूँ तब तब लिखता हूँ
पागल होता हूँ लिखने से? चल हट पागल
जो नइँ होते पागल वो हो जाते पागल
जीवन भर दुत्कारे जाते चल हट पागल















