ye sab paaya paagalpan se chal hat paagal | ये सब पाया पागलपन से चल हट पागल

  - Anmol Mishra

ये सब पाया पागलपन से चल हट पागल
फिर भी मुझ सेे सब हैं कहते चल हट पागल

पागलपन में सोऊँ‌ जागूँ उट्ठूँ बैठूँ
पागल हूँ मैं पागलपन से चल हट पागल

चल हट पागल छोड़ कलाई जाने भी दे
जाने दूँ? तुम आए कब थे? चल हट पागल

दुनिया बोली ठीक नहीं है ये पागलपन
मैं बोला, क्या मतलब तुझ सेे? चल हट पागल

लौटी लहरें साहिल से हरदम ये कहकर
रेत उड़ाओ हम हैं जाते चल हट पागल

पागलपन की हद तक जाना पागलपन है
मैं जाऊँगा हदस आगे चल हट पागल

ख़ुद से बातें करने वाले पागल हैं गर
दम है ख़ुद को चुप रहने दे चल हट पागल

जब जब पागल होता हूँ तब तब लिखता हूँ
पागल होता हूँ लिखने से? चल हट पागल

जो नइँ होते पागल वो हो जाते पागल
जीवन भर दुत्कारे जाते चल हट पागल

  - Anmol Mishra

Baaten Shayari

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