अब तक तबाही के ये इशारे उसी के हैं
ये तख़्त ओ ताज इस लिए सारे उसी के हैं
डसने का जिस का काम ही सदियों से चल रहा
ये नाग हैं उसी के पिटारे उसी के हैं
हर एक शख़्स अब भी मोहब्बत के साथ है
जो नफ़रतों में पल रहे सारे उसी के हैं
मसनद पे उस को लाके बड़ी भूल हो गई
अब तक दिए हुए ये ख़सारे उसी के हैं
साइंस-दाँ से आगे हाँ एक साईं भी तो है
ये चाँद है उसी का सितारे उसी के हैं
— Ansar Eatvi















