
मुझे हर दम ये लगता है कि तन्हाई अकेली है
जहाँ बिन डर के बैठेगी वही मेरी हवेली है
तुम्हारी क्या ख़बर मुझ को न मेरी है ख़बर तुम को
सुलझ जाए किसी से भी तो क्या ही ये पहेली है
— Anubhav Gurjar
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