
सुनो तुम साथ में चल दो हमारी इस कहानी के
तुम्हें क़िस्से सुनाऊँगा बुढ़ापे में जवानी के
हमारी गाँव पंचायत तुम्हारी हो तो जाएगी
मगर दिन-रात काटोगी यहाँ पर धूल पानी के
— Anubhav Gurjar
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