bichhadkar tumse KHud se bhi badaa rootha raha hooñ main | बिछड़कर तुम सेे ख़ुद से भी बड़ा रूठा रहा हूँ मैं

  - anupam shah

बिछड़कर तुम सेे ख़ुद से भी बड़ा रूठा रहा हूँ मैं
तुम्हारे बाद मुश्किल से बहुत जिंदा रहा हूँ मैं

निकम्मा कर दिया मुझको तुम्हारी एक हिजरत ने
वगरना घर का सब सेे लाडला लड़का रहा हूँ मैं

मोहब्बत है, जो नरमी है, तुम्हारे वासते मुझ
में
तुम्हें मैं क्या बताऊँ, क्या था और कैसा रहा हूँ मैं

तुम्हारे हिज़्र में बीता है हर लम्हा तुम्हारे संग,
तुम्हारे बिन तुम्हारा बन के इक अरसा रहा हूँ मैं

मिरे छज्जे से लगकर साथ में ही था मकाँ उसका
मगर मिलने को उस सेे, दूर ही जाता रहा हूँ मैं

  - anupam shah

Ghar Shayari

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