"नाकामी"
मैं हर रात टेलीस्कोप उठाता हूँ
आसमान से परे झाँकता हूँ
शायद कोई पैरेलल यूनिवर्स हो
जहाँ तू अब भी मेरी बाहों में हो
तुझे देखते ही मैं
वक़्त को मोड़ देता
किसी वॉर्महोल से गुज़रकर
उस लम्हे में लौट जाता
जहाँ तू मेरे बाएँ कंधे पे सिर रखे
तमाम सय्यारों की गर्दिशें रोक रही हो
लेकिन यहाँ
इस ज़मीं पर
तेरा न होना
मेरी सब से हसीन थ्योरी की
सब से गहरी नाकामी है
— Arman Habib















