dard ko aur bahut zor jhanjhodaa jaa.e | दर्द को और बहुत ज़ोर झँझोड़ा जाए

  - A R Sahil "Aleeg"

दर्द को और बहुत ज़ोर झँझोड़ा जाए
जो मरासिम हैं उन्हें जल्द ही तोड़ा जाए

इस की दीवारों से सर और न फोड़ा जाए
क़स्र तन्हाई का अब जल्द ही तोड़ा जाए

एक मुद्दत से इसी सोच में दिल डूबा है
किस तरह साथ भला आपका छोड़ा जाए

दुश्मनी प्यास ने करली है समंदर से दोस्त
सोचती रहती है पत्थर ही निचोड़ा जाए

बेरुख़ी जान भी ले सकती है दीवाने की
चाहने वाले से मुँह और न मोड़ा जाए

  - A R Sahil "Aleeg"

Nafrat Shayari

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