
आप जिस चीज़ को कहते हैं कि बेहोशी है
वो दिमाग़ों में ज़रा देर की ख़ामोशी है
सूखते पेड़ से पंछी का जुदा हो जाना
ख़ुद-परस्ती नहीं एहसान-फ़रामोशी है
— Ashu Mishra
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