दिन टल रहे हैं मसअला टल क्यूँ नहीं रहा
आख़िर मैं वक़्त रहते सँभल क्यूँ नहीं रहा
साँचा बनाए बैठा हूँ और सोचता हूँ मैं
वो हुस्न मेरे इश्क़ में ढल क्यूँ नहीं रहा
क्या मर गए हैं लोग ज़माने में तेरे बा'द
दुनिया में कोई तेरा बदल क्यूँ नहीं रहा
— Ashutosh Vdyarthi















