
चलो तन्हाइयों को आज फिर आबाद करते हैं
किसी भूली हुई हस्ती को दिल से याद करते हैं
बुरी आदत है मुझ को भूलने की इस लिए ऐ दोस्त
जिसे है भूलना अक्सर उसी को याद करते हैं
— Abdulla Asif
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