ये भरोसा नहीं कर सकते के वो सच्चा है
हाँ मगर यार वो इंसान बड़ा अच्छा है
क्या हुआ जो मिरा दिल थोड़ा अभी कच्चा है
इश्क़ का तुझ से इरादा तो मिरा पक्का है
ये क़लम उस के लिए चलती है मेरी 'आतिफ़'
जिस ने इक फूल किताबों में छुपा रक्खा है
नींद रातों में न आए तो समझ लेना तुम
अब शब-ए-हिज्र-ए-मुदाम आएगी ये पक्का है
— Atif khan















