अगर है प्यार मुझ सेे तो बताना भी ज़रूरी है

दिया है हुस्न मौला ने दिखाना भी ज़रूरी है

इशारा तो करो मुझ को कभी अपनी निगाहों से
अगर है इश्क़ मुझ से तो जताना भी ज़रूरी है

अगर कर ले सभी ये काम झगड़ा हो नहीं सकता
ख़ता कोई नज़र आए छुपाना भी ज़रूरी है

अगर टूटे कभी रिश्ता तुम्हारी हरकतों से जब
पड़े क़दमों में जा कर फिर मनाना भी ज़रूरी है

कभी मज़लूम आ जाए तुम्हारे सामने तो फिर
उसे अब पेट भर कर के खिलाना भी ज़रूरी है

अगर रोता नज़र आए कभी मस्जिद या मंदिर में
बड़े ही प्यार से उस को हँसाना भी ज़रूरी है

— Muhammad Asif Ali

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