vafaa ka bill chukaana bhi nahin aata | वफ़ा का बिल चुकाना भी नहीं आता

  - Muhammad Asif Ali

वफ़ा का बिल चुकाना भी नहीं आता
ख़फ़ा से दिल लगाना भी नहीं आता

दिया था घाव तू ने ख़ास जिस दिल पर
निशाँ उसका दिखाना भी नहीं आता

मकाँ अच्छा नहीं था पर बना मेरा
ज़माने को भगाना भी नहीं आता

मिला कैसे तुझे हर फ़न बता मुझ को
मुझ सेे सुनना सुनाना भी नहीं आता

ज़मीं पर बैठकर अच्छा हँसाते थे
मगर अब ग़म उठाना भी नहीं आता

बदलते आज की ख़ातिर बदलते हम
सदी में सन बढ़ाना भी नहीं आता

जिसे तुम क़त्ल करने रोज़ जाते हो
हमें उस को बचाना भी नहीं आता

ख़िज़ाँ के ज़ख़्म भरते भी नहीं जल्दी
हमें मरहम लगाना भी नहीं आता

किसे हमको बचाना है बता दो तुम
दवा सबको खिलाना भी नहीं आता

किनारे पे समुंदर के रवाँ लहरें
बिखरता दिल उठाना भी नहीं आता

सदाएँ गूँजती आमान में तेरी
हमें क़िस्सा सुनाना भी नहीं आता

बता 'आसिफ़' हमारी शा'इरी का तुक
लिखा मक़्ता' मिटाना भी नहीं आता

  - Muhammad Asif Ali

Wafa Shayari

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