kuchh soch kar kaha hai ki teraa nahin hooñ main | कुछ सोच कर कहा है कि तेरा नहीं हूँ मैं

  - Aves Sayyad

कुछ सोच कर कहा है कि तेरा नहीं हूँ मैं
तू चाहता है उतना तो अच्छा नहीं हूँ मैं

मालूम है मुझे तू अभी किसके साथ है
पागल हुआ हूँ पर अभी इतना नहीं हूँ मैं

सड़को पे दर-ब-दर किया है तेरे 'इश्क़ ने
पैरों में ग़म की गाँठ है बहका नहीं हूँ मैं

यादों ने तेरी घर को परिंदों से भर दिया
तन्हा किया था तू ने प' तन्हा नहीं हूँ मैं

फिर तेरे बाद यूँँ हुआ सिगरेट नहीं बुझी
होंटों पे सुर्ख़ियाँ रहीं ज़िंदा नहीं हूँ मैं

हाथों की तेरी चूड़ी हूँ जिस्मों की मैं रिदा
पायल या तेरी बाली बता क्या नहीं हूँ मैं

तू ने भी मेरे नाम से क्या क्या नहीं किया
ये मेरा ज़र्फ़ है तुझे कहता नहीं हूँ मैं

कितनी ही नेकियाँ मेरे काँधों पे दर्ज है
कितनो का दिल रखा कभी गिनता नहीं हूँ मैं

सय्यद मुझे तो हिज्र में सहरा नहीं मिला
सय्यद दिवाना हो के भी भटका नहीं हूँ मैं

  - Aves Sayyad

Ulfat Shayari

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