ik birhaman ko kundli maine dikhaai theek hai | इक बिरहमन को कुंडली, मैंने दिखाई ठीक है

  - Aves Sayyad

इक बिरहमन को कुंडली, मैंने दिखाई ठीक है
सो 'इश्क़ के हैवान से, अपनी लड़ाई ठीक है

ये रात जुगनू संग मुझ को जागनी थी वैसे तो
इस सर्द मौसम में मिली तो बस रज़ाई ठीक है

दिल पर लगा हो ज़ंग पर, कोई तबी'अत पूछ ले
तो आदतन ये कहना पड़ता है कि भाई ठीक है

ये शहर तेरे नाम पर जाने बसाया क्यूँ गया
ये बात अलग है, तूने जो चीज़ें बनाई ठीक है

उसने मुझे खत में लिखा लाइक़ नहीं हूँ उसके मैं
हाँ! बात कड़वी थी, मगर उसकी लिखाई ठीक है

तोहमत न जाने कितनी ही यूँंँ तो मेरे ऊपर लगी
लेकिन सनम, अफ़वाह जो तूने उड़ाई, ठीक है?

बैठक रसोई और कमरे दो, मिला कर चार हैं
इस घर की यानी, कुल मिला कर के रुबा'ई ठीक है

यूँँ बे-रुख़ी सय्यद न कर, ख़्वाबों में उसके आने पर
नम तो नहीं, पर उसकी आँखों की भराई ठीक है

  - Aves Sayyad

Kashmir Shayari

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