एक माॅं की कोख सूनी हादसा वो कर गया
एक बच्चा भूख के ख़ातिर ही देखो मर गया
साथ में रहते थे देखो आज वो वीरान हैं
ग़म के ओले पड़ रहे हैं ख़ुशियों का मंज़र गया
पाई पाई जोड़ राजा ने बनाई सल्तनत
अपने ही ग़द्दार निकले पीठ में ख़ंजर गया
दौलतों का दौर था वो सब खड़े थे साथ में
एक रिश्ता वक़्त के हाथों ही देखो मर गया
आजकल का दौर कैसा मतलबी सब यार हैं
प्यार अब होता नहीं है प्यार से दिल भर गया
— ABHISHEK RANJAN















