अपनी हर हसरत मिटाना चाहता हूँ
मैं तुझे क़िस्मत बनाना चाहता हूँ
बंद करले आँख अपनी और सो जा
मैं तेरे ख़्वाबों में आना चाहता हूँ
सामने तेरे गले लग कर किसी के
प्यार अपना आज़माना चाहता हूँ
तू मुझे याद आ रही है उतनी ज़्यादा
मैं तुझे जितना भुलाना चाहता हूँ
रोक कर यह क़ाफ़िला यादों का तेरी
ज़िन्दगी फिर से चलाना चाहता हूँ
जब वफ़ा का अज्र मिलता था सज़ा नइँ
दौर फिर से वो पुराना चाहता हूँ
साथ तू जस्सर रहे गर हर सफ़र में
फिर न मंज़िल कोई पाना चाहता हूँ
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