apni har hasrat mit | अपनी हर हसरत मिटाना चाहता हूँ

  - Avtar Singh Jasser

अपनी हर हसरत मिटाना चाहता हूँ
मैं तुझे क़िस्मत बनाना चाहता हूँ

बंद करले आँख अपनी और सो जा
मैं तेरे ख़्वाबों में आना चाहता हूँ

सामने तेरे गले लग कर किसी के
प्यार अपना आज़माना चाहता हूँ

तू मुझे याद आ रही है उतनी ज़्यादा
मैं तुझे जितना भुलाना चाहता हूँ

रोक कर यह क़ाफ़िला यादों का तेरी
ज़िन्दगी फिर से चलाना चाहता हूँ

जब वफ़ा का अज्र मिलता था सज़ा नइँ
दौर फिर से वो पुराना चाहता हूँ

साथ तू जस्सर रहे गर हर सफ़र में
फिर न मंज़िल कोई पाना चाहता हूँ

  - Avtar Singh Jasser

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