चलता रहता है मोहब्बत का सफ़र यादों के साथ
दिल की हर इक रहगुज़र है तर-ब-तर यादों के साथ
तेरा चर्चा, तेरी बातें और तेरी आरज़ू
करता रहता हूँ मैं अक्सर बैठ कर यादों के साथ
मेरे घर के सहन में धोके से ही लेकिन कभी
शाम होते ही सनम तू भी उतर यादों के साथ
घर मेरा फ़िरदौस में तबदील हो जाए सनम
तुम भी आ जाओ मेरे घर पे अगर यादों के साथ
ज़िंदगी के इस सफ़र में आप की दरकार है
ज़िंदगी होती नहीं जस्सर बसर यादों के साथ
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