"तुझे चाहते रहे"

तुझे चाहते रहे उम्र भर
पर तुझे कभी कुछ कहा नहीं
या कहा भी तो बस निगाह से
जो तुझे कभी भी सुना नहीं

मेरा इश्क़ दरिया नहीं रुका
तू मुझे मगर नहीं मिला
न शिकायतें मुझे रब से हैं
न है मुझ को तुझ से कोई गिला

तुझे सोचना, तुझे देखना
तुझे ढूढना, तुझे माँगना
मेरे इश्क़ का ये जुनून था
मेरी ज़ीस्त का तू सुकून था

ये जहाँ बड़ा ही अजीब है
जो न चाहिए वो नसीब है
तू हक़ीक़तों में है दूर पर
तू ख़याल में तो क़रीब है

तुझे भूलना कभी चाहा भी
तो ख़ुद ही ख़ुद ही से उलझ पड़े
तुझे याद जब जस्सर किया
नम आँखों से हम हँस पड़े

तुझे चाहते रहे उम्र भर
पर इज़हार तुझ से किया नहीं
या किया भी तो बस निगाह से
जिस का जवाब तू ने दिया नहीं

— Avtar Singh Jasser

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