jaane kaisa sog manaaya jaata hai | जाने कैसा सोग मनाया जाता है

  - Azbar Safeer

जाने कैसा सोग मनाया जाता है
कुछ क़ब्रों पर दिया जलाया जाता है

कुछ जिस्मों की लज़्ज़त पूरी करने को
कुछ जिस्मों को खींच के लाया जाता है

वो आँखें पिंजरे में होती हैं जिन को
आज़ादी का ख़्वाब दिखाया जाता है

वस्ल तो पहला राग है सब गा लेते हैं
हिज्र कहाँ हर एक से गाया जाता है

कुछ नुक़्ते अल्फ़ाज़ की ज़ीनत होते हैं
कुछ नुक़्तों से काम चलाया जाता है

मुमकिन है कि रोने का कुछ वक़्त मिले
बारिश का इम्कान बताया जाता है

  - Azbar Safeer

Chehra Shayari

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