jo bach ga.e hain charaagh un ko bachaaye rakho | जो बच गए हैं चराग़ उन को बचाए रक्खो

  - Azm Shakri

जो बच गए हैं चराग़ उन को बचाए रक्खो
मैं जानता हूँ हवा से रिश्ता बनाए रक्खो

ज़रूर उतरेगा आसमाँ से कोई सितारा
ज़मीन वालो ज़मीं पे पलकें बिछाए रक्खो

अभी वहीं से किसी के ग़म की सदा उठेगी
उसी दरीचे पे कान अपने लगाए रखो

हमेशा ख़ुद से भी पुर-तकल्लुफ़ रहो तो अच्छा
ख़ुद अपने अंदर भी एक दीवार उठाए रक्खो

  - Azm Shakri

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