जब दिल ने तड़पना छोड़ दिया
जलवों ने मचलना छोड़ दिया
पोशाक बहारों ने बदली
फूलों ने महकना छोड़ दिया
पिंजरे की सम्त चले पंछी
शाख़ों ने लचकना छोड़ दिया
कुछ अबके हुई बरसात ऐसी
खेतों ने लहकना छोड़ दिया
जब से वो समुंदर पार गया
गोरी ने सँवरना छोड़ दिया
बाहर की कमाई ने बेकल
अब गाँव में बसना छोड़ दिया
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