कुछ एक की हम जैसी क़िस्मत होती है
बाकी सब की अच्छी क़िस्मत होती है
ख़्वाहिश सब रखते हैं तुझ को पाने की
और फिर अपनी अपनी क़िस्मत होती है
ख़्वाबों में तो दिख जाते हैं कम-अज़-कम
दिन से अच्छी शब की क़िस्मत होती है
उन की गलियों में जा कर अहसास हुआ
गलियों गलियों की भी क़िस्मत होती है
उस ने मुझ को हँसकर देखा है यारा
मैं ये समझूँ या'नी..क़िस्मत होती है
— Bhaskar Shukla















